वर्तमान समय हर एक मनुष्य के मन में अनेक उलझनें है, जीवन में नई-नई चुनौतियां हैं, समस्याएं हैं लेकिन जहां समस्या है वहां समाधान भी है
"परमात्मा को साथी बनाकर सर्व समस्याओं का समाधान कर सकते हैं"- ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी
इंदौर
"गीता शास्त्र संवाद का शास्त्र है। इसमें श्रीकृष्ण, अर्जुन, संजय, धृतराष्ट्र, आदि पात्र हैं। गीता के प्रथम अध्याय में अर्जुन उलझन में तनावग्रस्त थे कि मैं अपनों के बीच कैसे युद्ध करूं? अर्जुन की समस्याएं सभी सांसारिक समस्याएं थी लेकिन गीता ज्ञान सुनते-सुनते उनकी सभी समस्याओं का हल मिल गया, वह पूरी तरह संतुष्ट होकर पूर्ण रूप से समर्पित हो युद्ध के लिए तैयार हो गए। गीता ज्ञान केवल एक अर्जुन के लिए नहीं अपितु हम सभी ज्ञान का अर्जन करने वाले अर्जुन सदृश्य हैं। वर्तमान समय हर एक मनुष्य के मन में अनेक उलझनें है, जीवन में नई-नई चुनौतियां हैं, समस्याएं हैं लेकिन जहां समस्या है वहां समाधान भी है। आपने उदाहरण दिया कि ताला बनाने वाले ने चाबी भी साथ-साथ बनाई है। हमें देखना यह है कि किस मनःस्थिति से हम समस्याओं का हाल ढूंढते हैं। केवल बाह्य प्रयासों से समस्याओं का स्थाई हल नहीं निकल सकता। अंदर से शांत रहकर परमपिता को साथी बनाकर उनसे बात करना सीख जाए तो सर्व समस्याओं का समाधान हो सकता है।" उक्त विचार हुबली से पधारी गीता ज्ञान विशेषज्ञा एवं प्रेरक वक्ता ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने चार दिवसीय शिविर के दूसरे सत्र में 'सांसारिक चिंताओं का आध्यात्मिक समाधान' विषय पर रखें।
आगे आपने बताया कि जिस प्रकार मंदिर में जाते हैं तो कीमती जूते- चप्पल भी बाहर उतार कर जाते हैं। इसी प्रकार भगवान से मिलने व संबंध जोड़ने के लिए शरीर रूपी जूते को छोड़ अर्थात् नश्वर देह के अभिमान को निकाल स्वयं को आत्मा निश्चय करना होगा। इसलिए मंदिर में जाते ही ओम का उच्चारण किया जाता है।
आपने अपने जीवन का अनुभव सुनाते हुए कहा कि मैंनें बचपन में दादा-दादी को गीता का पाठ करते देख उनसे श्लोक बोलना सीखा और मेरे अंदर इंटरेस्ट आ गया। वर्तमान समय हम अपने बुजुर्गों से दूर हो गए हैं इसलिए हमारे संस्कार और हमारी संस्कृति कमजोर होती जा रही है, जड़े कमजोर हो रही हैं। हमारे बुजुर्ग हमारे मार्गदर्शक, मेंटर, जादू की छड़ी होते हैं। उनके पास हमारी सभी समस्याओं का समाधान होता है।
क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में मेडिटेशन के माध्यम से स्वयं से और परमात्मा से कनेक्शन जोड़कर वार्तालाप करना सिखाया जाता है। चार दिवसीय शिविर के बाद 30 सितंबर से सात दिवसीय राजयोग अनुभूति शिविर का आयोजन ज्ञानशिखर में किया गया है, जिसका समय प्रातः 7 से 8:30 और संध्या 7 से 8:30 बजे तक रहेगा। किसी भी एक सत्र में भाग लिया जा सकता है।
उक्त जानकारी ब्रह्माकुमारी अनीता बहन –ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन, इंदौर द्वारा दी गई है ।

