गीता ज्ञान सुनना नहीं, अपितु जीना है"- ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी, हुबली
इंदौर, 27 सितंबर। श्रीमद्भगवत गीता जीवन जीने की कला सिखलाने वाली अद्भुत ज्ञान वर्षा है। सामान्य तरीके से हम सुनते हैं कि गीता वृद्धावस्था में सुनना चाहिए या मृत्यु के समय या मृत्यु के बाद गीता पाठ रखना चाहिए, यह तो लोगों के अंदर गलतफहमियां है। पहले इसे दूर करना है क्योंकि गीता केवल एक धर्मशास्त्र नहीं अपितु स्वयं परमात्मा के मुख कमल से निकली मूर्छित मनुष्य आत्माओं को सुरजीत करने की संजीवनी बूटी है। गीता मनुष्य जीवन के लिए वरदान है। गीता ज्ञान की रोशनी में कुछ भी असंभव नाम की चीज नहीं है। हमें गीता ज्ञान केवल सुनना नहीं अपितु गीता के अनुसार जीवन जीना है।
उक्त विचार ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में आयोजित चार दिवसीय "गीता का सार, श्रेष्ठ जीवन का आधार" शिविर के शुभारंभ अवसर पर हुबली से पधारी गीता ज्ञान विशेषज्ञा एवं प्रेरक वक्ता राजयोगिनी वीणा दीदी ने उच्चारे।
इस अवसर पर इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने वीणा दीदी का स्वागत करते हुए कहा कि वीणा बहन ने न केवल गीता को समझा है अपितु उसे प्रैक्टिकल जीवन में उतारकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाया है। हम वही अनुभव इन चार दिनों तक चलने वाले शिविर में सुनेंगे।
इस्कॉन प्रमुख स्वामी महामनदास ने अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि गीता सर्वशास्त्रमई शिरोमणि जीवन बनाने का शास्त्र है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन द्वारा किया गया। श्री श्री 1008 सीमानंद जी गिरी छोटू महाराज महामंडलेश्वर आह्वान अखाडा राष्ट्रीय अध्यक्ष, मोयरा ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट पवन सिंघानिया तथा बैंक ऑफ़ इंडिया के चीफ मैनेजर भ्राता सुमित मांडेकर ने अपनी शुभकामनाएं दी। कुमारी नियति ने बहुत सुंदर गीत की प्रस्तुति दी। संचालन मेडिकल विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्माकुमारी उषा बहन ने किया। शिविर में शहर के सभी वर्गों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

