हम प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि उसी का हिस्सा हैं
विश्व पर्यावरण दिवस सप्ताह 2026 के पांचवें दिन इन्फोसिस इंदौर से पद्म श्री जनक पलटा मगिलिगन ने “सतत सामुदायिक विकास के लिए सामूहिक जलवायु कार्रवाई का आवाहन किया |
"विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित 34 वें वार्षिक “पर्यावरण संवाद सप्ताह” 2026 के पांचवें दिन इन्फोसिस इंदौर कंपनी के " इकोविज़न 2026 " के " पर्यावरण जागरूकता से प्रभाव तक" सत्र की मुख्य अतिथि पद्म श्री डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन ने बताया "यू एन ई पी ने इस वर्ष की थीम “जलवायु कार्रवाई” करने के लिए सामूहिक कार्य " घोषित किया है इस लिए आपके साथ जुड़कर “सतत सामुदायिक विकास के लिए सामूहिक जलवायु कार्रवाई” विषय और चर्चा में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी है । पिछले 41 साल के पर्यावरण को समर्पित सस्टेनेबल लिविंग के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा ' सस्टेनेबल जीवन का सबसे बड़ा सबक यह रहा है कि हम प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि उसी का हिस्सा हैं। सादगी में ही असली खुशी है।"
इन्फोसिस कंपनी की सी.एस.आरइंचार्ज मोना धरमसी ने कहा डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन "आपका हमारे साथ जुड़ना हमारे लिए सचमुच सम्मान की बात है। इन्फोसिस सी एस आर ऐसा व्यावसायिक मॉडल है जिसमें कंपनि अपनी कार्यप्रणाली में सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को शामिल करती हैं, और स्वेच्छा से समाज के लाभ तथा नैतिक व्यावसायिक आचरण सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करती हैं। सी.एस.आर अपनी ग्रामीण विद्युतीकरण, पारंपरिक खाना पकाने और घरेलू बायोगैस परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बना रही है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम कर रही है। इंदौर की सी.एस.आर पहल का नेतृत्व इसके स्थानीय कर्मचारी स्वयंसेवक समूह 'अनुभूति' द्वारा किया जाता है, जो स्थानीय समुदाय पर प्रभाव डालने के लिए एनजीओ के साथ साझेदारी करता है। मुख्य गतिविधियाँ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं, जो कंपनी के व्यापक राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं। "सतत सामुदायिक विकास के लिए सामूहिक जलवायु कार्रवाई" का आयोजन एक 'ज़ीरो-वेस्ट' और 'प्लास्टिक-मुक्त' कार्यक्रम आयोजित करने के संबंध में आपके मार्गदर्शन को हम पूरी तरह स्वीकार करते हैं और उसका सम्मान करते हैं; हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी व्यवस्थाएँ इसी के अनुरूप हों। आज ऐसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सत्र के लिए आपकी मेज़बानी करना हमारे लिए अत्यंत सम्मान और सौभाग्य की बात थी। एक सामाजिक कार्यकर्ता और 'सस्टेनेबिलिटी एडवोकेट' (सतत विकास के समर्थक) के रूप में आपकी असाधारण यात्रा, और साथ ही महिला सशक्तिकरण व सतत विकास के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता ने हम सभी पर एक गहरा और अमिट प्रभाव छोड़ा है। इंदौर जिले गाँव सनावादिया स्थित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में आपके अग्रणी कार्यों, तथा सौर ऊर्जा, जैविक खेती और 'ज़ीरो-वेस्ट' जीवनशैली के क्षेत्र में आपकी पहलों के बारे में जानना सचमुच ज्ञानवर्धक अनुभव था।
ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाकर, समुदाय में सार्थक परिवर्तन लाने के आपके प्रयासों से हम विशेष रूप से प्रेरित हुए हैं।
आपके ये सशक्त शब्द आज भी हमारे मन में गूंज रहे हैं:
• "कर्म ही पूजा है; सेवा ही प्रार्थना है।"
• "हम अपना जीवन कैसे जिएँ, यह चुनने का अधिकार हमारे पास है।"
• "सच्चा कर्म शरीर, मन और आत्मा को एकाकार कर देता है।"
एक ज्ञानवर्धक तथा प्रभावशाली सत्र में अपनी बुद्धिमत्ता, अनुभवों और मूल्यों को हमारे साथ साझा करने के लिए एक बार पुनः आपका धन्यवाद। आपके इस सत्र ने हमें अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक, दोनों ही जीवन में 'उद्देश्य-पूर्ण कार्य' और 'सचेत जीवनशैली' अपनाने के लिए सचमुच प्रेरित किया है।

