जिम्मी मगिलिगन सेंटर में विश्व पर्यावरण दिवस 2026
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में पर्यावरण संवाद सप्ताह का शुभारंभ श्री वीरेंद्र गोयल, डॉ. नीरजा पौराणिक और जनक मगिलिगन द्वारा प्रकृति को समर्पित प्रार्थनाओ से किया । डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन ने सभी का स्वागत किया और बताया की 1992 से चले आ रहे उनके द्वारा पर्यावरण संवाद का 34 वा साल हैं । उन्होंने बताया की UNEP द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम सामूहिक कार्रवाई घोषित की गई। उन्होंने जानकारी दी कि यह पहल 'संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम' (UNEP) के मार्गदर्शन में चलाई जा रही है, और उन्होंने सभी को पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार तौर-तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। सप्ताहभर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं एवं आम नागरिकों को सतत विकास के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के प्रति संवेदनशील बनाना तथा स्वयं और अपने आसपास के वातावरण से शुरुआत करते हुए “जलवायु कार्रवाई” के लिए प्रेरित करना है। डॉ. जनक ने सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) को समझने के अपने सफ़र को साझा किया। उन्होंने अपनी जीवन-गाथा सुनाते हुए समझाया कि उन्हें सतत विकास का सही अर्थ कैसे समझ में आया और आज की दुनिया में यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है; साथ ही उन्होंने इस कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में भी बताया।
उन्होंने पहली बार 'सतत विकास' (Sustainable Development) की परिभाषा जब 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित 'अर्थ समिट' (पृथ्वी शिखर सम्मेलन) में भाग लिया था तब वहाँ से उन्हें इसकी गहरी अंतर्दृष्टि मिली और उन्होंने 'सतत जीवन शैली' का संकल्प लिया। जनक, 'बर्ली डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट फॉर रूरल की संस्थापक निदेशक थीं। इस अनुभव ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया; वे पर्यावरण के प्रति अत्यंत जागरूक और सचेत व्यक्ति बन गईं और उन्होंने स्वयं भी पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली का अभ्यास शुरू कर दिया। उनके पति, स्वर्गीय जेम्स (जिम्मी) आर. मगिलिगन—जो कि एक भूमि सुधार विशेषज्ञ, जल निकासी विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् थे—उसी संस्थान के प्रबंधक थे। उन दोनों ने मिलकर 6 एकड़ के उस परिसर को विकसित किया; इसकी शुरुआत उन्होंने 40 साल पुराने एक सूखे हुए कुएं को पुनर्जीवित करने से की थी। उन्होंने इस परिसर को प्लास्टिक-मुक्त, प्रदूषण-मुक्त, जैविक खेती वाला, सोलर थर्मल किचन और पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित 'हरित परिसर' विकसित किया, जिसमें वर्षा जल संचयन की भी व्यवस्था थी। उन्होंने प्रशिक्षण के सभी पाठ्यक्रम भी तैयार किए और 26 वर्षों के दौरान, 6-6 महीने के प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से 6000 अशिक्षित और गरीब आदिवासी लड़कियों को 'सामुदायिक स्वयंसेवकों' के रूप में प्रशिक्षित किया। उन लड़कियों ने 500 से अधिक गांवों में सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाए।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जिम्मी और जनक मगिलिगन फाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' के ट्रस्टी श्री वीरेंद्र गोयल के उद्घाटन भाषण से हुई, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन शैली के महत्व पर ज़ोर दिया। इस अवसर पर बोलते हुए, जाने-माने बायोटेक्नोलॉजिस्ट और 'रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट' के निदेशक डॉ. अनुराग तिवारी ने पानी और हवा को बचाने के लिए प्रेरित किया |
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, इंदौर वन प्रभाग के मुख्य वन संरक्षक (IFS) श्री पी. एन. मिश्रा ने सतत विकास, ज्ञानोदय और सकारात्मक सोच की शक्ति एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उज्जैन में कार्यरत रहते हुए शिप्रा नदी के किनारे एक लाख पौधारोपण का कार्य शासन-प्रशासन एवं स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से सफलतापूर्वक किया गया। बाद में देवास में पदस्थापना के दौरान उन्होंने सभी के सहयोग से शंकरगढ़ पहाड़ी के संरक्षण हेतु विशेष कार्य किए। उन्होंने जनक मैम की तुलना सूर्य की एक किरण से की, जो सभी को सतत विकास की राह दिखाती है और उनके मन में पर्यावरण के प्रति प्रेम जगाती है।
मालवांचल के मनोचिकित्सक डॉ. राम गुलाम ने संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने की आवश्यकता है तथा आज समाज को जिम्मी मगिलिगन एवं जनक मगिलिगन के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
विशेष अतिथि अनुराग तिवारी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट डायरेक्टर, एक्रोपोलिस यूनिवर्सिटी, इंदौर ने अपने संबोधन में बताया कि प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जीना अत्यंत सुकूनभरा, शांतिदायक एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला है। कार्यक्रम के अंत में फाउंडेशन के ट्रस्टी श्री वीरेंद्र गोयल जी ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डीएवीवी एमएसडब्ल्यू इंटर्न निलेश चौहान ने किया ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से गुजराती कॉलेज की सेवानिवृत्त प्रोफेसर जयश्री सिक्का, कलेक्टोरेट कार्यालय से महेंद्र धाकड़ जी, डीएवीवी इकोनॉमिक्स इंटर्न तुहिना झा, अमर नर्गेश, मालवांचल मनोचिकित्सा पीजी स्टूडेंट्स एवं सेंट पॉल इंस्टिट्यूट के स्टूडेंट्स उपस्थित रहे।

